तेरा भोलापन
तेरे इस भोलापन का,हर कोई दीवाना है।..२
तुम हो माली का उपवन,
जो हर एक कुसुम समाया है,
तुम गुण हिरण कस्तूरी का,
जो सबका मन महकाया है,
मेरी शाम की तू समा,
मेरा दिल तेरा परवाना है।
तेरे इस भोलापन का हर कोई दीवाना है।…२
तुम मणिकंचन की काया,
जो सबका मन ललचाया है,
तुम मोहनी रूप हो माया का,
जो सौंदर्या को समझाया है,
माना निगाहें टूट गई पर ,
दिल आज भी ठाना है।
तेरे इस भोलापन का हर कोई दीवाना है।..२
तुम भीषण गर्मी की ठंडक,
जो हर एक रूह समाया है,
तुम शिखर हिमालय पर्वत हो,
जो गंगा को पनपाया है,
झरनें संगीत का सरगम,
जो हर धुन गुनगुनाया है,
तेरे इस भोलेपन का हर कोई दीवाना है।..२
तुम हो करुणा की मूरत,
कुदरत तुझमें खोया है,
हँसना है तेरी फिदरत,
तुझें देख कुसुम सरमाया है,
तुम चुनर विधाता की,
जहाँ सबने शी
श झुकाया है,
तेरे इस भोलेपन का हर कोई दीवाना है।..२
